किसी भी शै की तमन्ना ही नहीं हमको जमाने में
मदीना ही लिख दिया जाए हमारे अबे दाना में
🌺 या रब नजरों को कुछ ऐसी बिनाई दे 🌺
🌺 जिधर देखूँ मुझे मदीना दिखाई दे 🌺
🌺 काश ऐसी रवानी हो आज हवाओं में 🌺
🌺 नबी पे सलाम पढूँ और जवाब मुझे सुनाई दे 🌺
वो अर्श का चांद है मैं कदमो की धूल
ऐ जिंदगी गवाह रहना मैं हूँ आशिके रसूल
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